25 आत्मसमर्पित नक्सलियों को जिला जेल में उनके परिजनों से मुलाकात कराया गया

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सुकमा, 27 नवंबर । बस्तर में नक्सलवाद अंतिम सांसे गिन रहा है, बड़ी संख्या में नक्सली लगातार आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। बीते दिनों गृहमंत्री विजय शर्मा बस्तर प्रवास के दौरान गृहमंत्री से नक्सलियों के परिजनों ने कहा था कि, उनको जेल में बंद परिवार वालों से मिलने दिया जाए। विजय शर्मा ने उनको आश्वासन दिया था, कि उनकी मुलाकात उनके परिजनों से जरुरी कराई जाएगी। आज गुरुवार को इसी कड़ी में बस्तर संभाग के आत्मसमर्पित नक्सलियों के परिजनों को जेल परिसर में लाया गया। जेल परिसर में लाने के बाद जेल में बंद उनके परिजनाें से उनकी मुलाकात कराई गई। आज 25 आत्मसमर्पित नक्सलियों को जिला जेल में उनके परिजनों से मिलने का मौका मिला, इस मौके पर सुकमा के कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव और पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण भी मौजूद रहे। जिला प्रशासन ने कहा कि, इस मुलाकात का मकसद आत्मसमर्पित नक्सलियों को दोबारा समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। मुलाकात के दौरान आत्मसमर्पित नक्सली अपने परिवार से मिलकर भावुक हो गए, परिजनों की आंखें नम हो आई। कोई अपने बेटे तो कोई अपने पिता को समझा रहा था कि अब गांव में शांतिपूर्वक जीवन बिताना है। आत्मसमर्पित नक्सलियाें से मिलने आई महिलाएं सबसे ज्यादा भावुक नजर आईं। सभी ने इस मुलाकात के लिए जिला प्रशासन को धन्यवाद दिया। परिजनों ने भरोसा दिलाया कि वो जेल में बंद अपने परिवार वालों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम करेंगे

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परिजनों से मुलाकात कराए जाने के दौरान सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम किए गए थे, आत्मसमर्पित नक्सलियाें से मिलने आए परिजन उनके लिए फल, बिस्किट, नमकीन और अचार लेकर आए थे। सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने कहा कि, पुनर्वास की आधारशिला केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक समर्थन भी है। परिवार का साथ मिलने से आत्मसमर्पित नक्सली हिंसा की राह से दूर होकर समाज का हिस्सा बनने की ओर कदम बढ़ाएंगे। यह मुलाकात न केवल उनके भीतर विश्वास जगाएगी, बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें मजबूत भी बनाएगी।

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